Sardar Vallabhbhai Patel सरदार वल्लभभाई पटेल

 सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के प्रथम गृह मंत्री थे और प्रथम उप प्रधानमंत्री थे।


सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष भी कहा जाता था सरदार ने ऐसे साहसिक कार्य किए थे जिसे लेकर पटेल का नाम लोह पुरुष रख दिया गया था

Sardar Vallabhbhai Patel ka janm kab hua tha

सरदार का जन्म 31अक्टूबर1875 के दिन हुआ था उनका जन्म स्थल गुजरात के खेड़ा जिले के नडियाद नाम के इलाके में हुआ था, तब यह ब्रिटिश इंडिया के बॉम्बे प्रेसीडेंसी में आता था।

Sardar Vallabhbhai Patel
Sardar Vallabhbhai Patel 


Sardar ki family

सरदार के पिताजी का नाम जवेर भाई पटेल था और माता का नाम लाड बा था, सरदार के चार ओर भाई के सोमाभाई पटेल, नरसी भाई पटेल, विट्ठल भाई पटेल, काशी भाई पटेल और उनकी बहन भी थी उनका नाम दही बेन पटेल था।


Sardar ki padhaai

सरदार की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने अपनी पढ़ाई गुजरात से की थी उसके बाद मिडिल टेंपल lnns ऑफ़ लंदन इंग्लैंड से पटेलने लो में डिग्री प्राप्त की थी।


Sardar ki shaadi

सरदार की शादी 1893 के साल में हुई थी, तब सरदार की उम्र 16 वर्ष की थी, उनकी धर्मपत्नी का नाम झावर बा पटेल था, जिनसे उनका एक बेटा दया भाई पटेल और एक बेटी मनीबेन पटेल भी थी।


सरदार की शादी बहुत कम उम्र में होने 22 वर्ष की उम्र में 10 वह कक्षा पास की थी, सरदार बचपन से ही बड़े साहसी थे, घर के हालात खराब होने के कारण सरदार ने कानून की पढ़ाई करने से मना कर दिया था,


दिन गुजरते गए और कुछ वक्त के बाद सरदार ने अपना कर भी छोड़ दिया और अपनी पत्नी के साथ गुजरात के गोधरा में रहने लगे।


1909में उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हो गई सरदार की धर्मपत्नी को कैंसर हो गया था और इसे कैंसर की बीमारी के चलते सरदार की पत्नी की मृत्यु हो गई इस बात का सरदार को काफी दुख लगा!


सरदार वल्लभभाई पटेल एक बैरिस्टर बनना चाहते थे लेकिन घर के हालत ठीक न होने के कारण सरदार अपने दोस्तों से पढ़ने के लिए बुक उधार मांगा करते थे,


इनके बावजूद सरदारने 36 वर्ष की उम्र में मिडिल टेंपल ऑफ लंदन से बैरिस्टर का 36 महीने का कोर्स मात्र 30 महीने में पूरा करलिया और बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त कर ली


फिर सरदार भारत वापस लौटे व गुजरात के गोधरा में बैरिस्टर के रूप में काम करने लगे, इस बीच सरदार को एक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा सरदार को संक्रामक रोग हुआ था, फिर सरदार गुजरात के अहमदाबाद में चले आए थे।


Sardar ki rajniti

सरदार की राजनीति वैसे सरदार को राजनीति में कोई रुचि नहीं थी लेकिन उनके दोस्तों ने सरदार को राजनीति में आने की सलाह दी तब सरदार राजनीति में आए थे तब वह साल था 1917 का तब सरदार ने पहली बार अहमदाबाद के नगर पालिका के चुनाव को लड़ा था और जीत हासिल की थी।


Sardar Vallabhbhai Patel vs Mahatma Gandhi

अब बात करें सरदार और गांधी की सरदार कभी भी गांधीजी की विचारधारा से खुश नहीं थे लेकिन जब महात्मा गांधी ने किसानों के लिए नीलक्रांति यानी कि इंडिगो रिवॉल्ट

को शुरू किया तब सरदार गांधीजी से काफी प्रभावित हुए।


Sardar Vallabhbhai Patel ka aandolan

एक समय ऐसा आया कि गुजरात के खेड़ा में भयंकर सूखा पड़ गया तब लोगों ने अंग्रेज सरकार से लगान काम करने की अपील की लेकिन अंग्रेज सरकार ने किसानों की बात को नजरअंदाज कर दिया,


तब सरदार ने पूरे देश के किसानों को एकजुट किया क्योंकि पहले से सारे देश के किसान अलग-अलग थे, फिर सरदार ने

अहिंसात्मक खेड़ा आंदोलन चलाया,


इस आंदोलन में अंग्रेज और किसानों के बीच काफी शंकर चला आखिरकार अंग्रेज को आंदोलन के सामने झुकना पड़ा और लगाने में बदलाव करने पड़े और यह सरदार का पहला जन आंदोलन था जो सफलतापूर्वक पूरा हुआ था,


 और सरदार का दूसरा आंदोलन बडोली था वह भी सफलता पूर्वक पूरा हुआ था सरदार ने यह दो आंदोलन से किसानों को उनकी छीनी गई जमीन जानवर और बंदी बनाए गए किसानों को आजाद करवाया।


सरदार के इस साहस को दिए महात्मा गांधी काफी प्रभावित हुई है और सरदार के प्रति गांधीजी का प्यार जाग उठा

और उनको सरदार के पद से सम्मानित किया तब सरदार-सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।


Jalianwala bag aandolan

जलियांवाला बाग में हिंसा के बाद गांधी जी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया तब सरदार ने अपना संपूर्ण साथ दिया था, उससे पहले सरदार सूट टाई टोपी यानी कि अंग्रेज के पोशाक पहनते थे लेकिन जलियांवाला बाग हिंसा के बाद सरदार ने अंग्रेज पोशाक उतार कर फेंक दिया और खादी के वस्त्र धारण कर लिए।


1920 में सरदार को गुजरात के कांग्रेस के अध्यक्ष के लिए चुना गया वह तीन बार 1922, 1924, 1927, तक

इस पद के लिए चुने गए थे।


जब 1940 आया तब देश मैं आजादी की गतिविधियाँ तेज हो गई थी और अन्य क्रांतिकारी की तरह सरदार को भी जेल जाना पड़ा था लेकिन लगातार आजादी का संघर्ष चलता रहा आखिरकार अंग्रेज को भारत देश छोड़ना पड़ा,


वह दिन 15 अगस्त 1947 का, आजादी के बाद सरदार को देश का पहला गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री बनाया गया था भारत देश आजाद तो हो गया था लेकिन देश में समस्या या कम नहीं थी देश में 562 ऐसी रियासतें थी जिस पर अंग्रेजी हुकूमत का कोई जोर नहीं चलता था 


Sardar Vallabhbhai Patel ka sahasi kam

फिर562 रियासतों को भारत में शामिल करने का जोखिम भरा काम को सरदार ने अपने हाथों में लिया और सभी रियासतों को सरदार ने भारत में शामिल करने का काम किया और सभी रियासतें भारत में शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं


लेकिन गुजरात के जूनागढ़ का नवाब जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करना चाहता था और हैदराबाद का नवाब हैदराबाद को एक अलग देश बनाना चाहता था


लेकिन जूनागढ़ की जनता भारत में शामिल होना चाहती थी इसलिए जूनागढ़ की जनता का सरदार को साथ मिला जूनागढ़ का माहौल काफी गर्म आ गया और जूनागढ़ के नवाब को अपनी जान बचाकर पाकिस्तान भागना पड़ा,


भारत को आजादी मिले 1 साल 1 महीना और 3 दिन हुआ था फिरभी हैदराबाद का निजाम भारत से अलग था फिर सरादरने अपना साहस दिखाते हुए 13 सप्टेंबर 1948

के दिन हैदराबाद में सैन्य कार्यवाही करने का निर्णय लिया था


जिसका नाम ऑपरेशन पोलो रखागया था हैदराबाद के नवाब को भारतीय सेना के सामने झुकना पड़ा लेकिन ऑपरेशन पोलो की खास बात यह थी कि इस ऑपरेशन पूर्ण करने में एक भी बूंद लहू की नहीं बेहनी चाहिए।


Sardar ka nidhan

और 15 दिसम्बर 1950 के दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल का निधन हार्ट अटैक से होगया था।


Kinjal dave ke saat kya huva........

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